nutriworld लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
nutriworld लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 26 फ़रवरी 2019

गुदा मार्ग की तीन बीमारियां भगंदर फिस्टुला पाइल्स बवासीर फिशर

आज हम गुदा मार्ग की 3 बीमारियों पर चर्चा करेंगे फिस्टुला या भगंदर पाइल्स या बवासीर और तीसरी है फिशर यानी कि खुदा का फट जाना। इस लेख में जानेंगे कि यह बीमारियां हमें क्यों होती हैं और इनके हो जाने पर इनका उपचार कैसे किया जाए और भोजन में क्या परिवर्तन किए जाएं जिससे यह ठीक हो जाएं। पाइल्स या बवासीर में गुदा मार्ग की नसें फूल जाती हैं यह एक प्रकार से वेरीकोज वेंस जैसी स्थिति हो जाती है जैसे वेरीकोज वेंस में पैर की नसें फूलती हैं उसी प्रकार बवासीर में गुदा मार्ग की नसें फूल जाती हैं अक्सर यह नसें फूल कर मस्से के रूप में बाहर भी आ जाती हैं। यह बीमारी गर्भवती महिलाओं को भी हो जाती है पेट में बच्चा होने के कारण बच्चे का दबाव गुदा मार्ग की नसों पर पड़ता है इससे भी वह फूल जाते हैं गर्भवती महिलाओं की  यह समस्या बच्चा हो जाने के बाद अपने आप खत्म हो जाती हैं किंतु आज कल की जीवनशैली के कारण अनेकों लोग बवासीर की चपेट में आए हुए हैं आधुनिक विज्ञान को नसों के फूल जाने का कारण ठीक से नहीं पता है किंतु यह देखा गया है कि जिन लोगों को कब्ज अधिक रहती है मल कड़ा निकलता है उनमें गुदा मार्ग की नसों पर अधिक दबाव पड़ने के कारण वे फूल जाती हैं। इसका संबंध सीधे-सीधे पेट से ही जुड़ा हुआ है आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इसका कोई स्थाई इलाज नहीं है।
वैसे इनसे कोई विशेष नुकसान नहीं होता लेकिन कभी-कभी दर्द होने लगता है अक्सर ये फूली हुई नसें जिन्हें आम भाषा में मस्से कहा जाता है गुदा मार्ग से बाहर आ जाते हैं और कभी-कभी यह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और इनसे खून बहने लगता है आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में इनको ऑपरेशन करके  नसों के फूले हुए हिस्सों को निकाल दिया जाता है।
हमारे गुदा मार्ग का क्षेत्र कई सारी रक्त वाहिकाओं का आखरी किनारा होता है। भगंदर में इन्हीं रक्त वाहिकाओं में पस पड़ जाता है सड़न हो जाती है जिस से गुदा मार्ग के आसपास छिद्र हो जाते हैं जिन से लगातार पस निकलता रहता है और दर्द भी होता है। भगंदर या फिस्टुला बीमारी उन लोगों में ज्यादा देखी गई हैं जिनको ज्यादा बैठकर काम करना होता है इसे ट्रक ड्राइवर सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल।
  फिशर में गुदा मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाता है और उससे खून निकलता रहता है वह गुदा मार्ग की मल को रोकने की क्षमता भी कम हो जाती है।
  आधुनिक चिकित्सा शास्त्र में बीमारियों का इलाज गुदा मार्ग पर जाकर ही किया जाता है जिसका परिणाम यह होता है की ऑपरेशन हो जाने के बाद दोबारा समस्याएं फिर खड़ी हो जाती हैं। इस बीमारी की जड़ कहीं और है अगर बीमारी होने के कारण ही अगर खत्म कर दिए जाएं तो बीमारी अपने आप ही ठीक हो जाती है।
  इन बीमारियों की जड़ हमारे पेट में छुपी है अगर आपको अधिक समय तक कब्ज रहेगी अर्थात मल का निष्कासन ठीक प्रकार से नहीं होगा तब इन बीमारियो के होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाएंगी। पेट का ठीक से साफ होना  अधिक जरूरी है  यदि हम लोग दिन में एक बार मल त्याग को जाते हैं तब यह समझते हैं कि हमारा पेट  ठीक से साफ हो रहा है  यह जरूरी नहीं कि आप हर रोज मल त्याग को जाएं और आपका पेट ठीक से साफ हो रहा हो। हमारी आधुनिक शैली के भोजन का काफी हिस्सा आंतों में चिपका हुआ रह जाता है जिसमें हानिकारक बैक्टीरिया पैदा होते हैं और बीमारियां पैदा करते हैं।
  पाचन अंगो को साफ रखने के लिए फाइबर युक्त भोजन ऐसे गाजर मूली पत्तेदार सब्जियां साग इत्यादि का सेवन अधिक से अधिक करें और संभव हो तो प्रतिदिन अमरूद सेब नाशपाती जैसे फल अवश्य खाएं इससे आपकी पाचन अंग साफ रहेंगे और आप इन बीमारियों से बचे रहेंगे।
  किंतु जब बीमारी हो जाती है तब खान पान में परिवर्तन भी काम नहीं कर पाता उस स्थति में आपको सहायता लेनी ही पढ़ती है।
   न्यूट्री वर्ल्ड में हम लोग दो काम करते हैं आंतरिक अंगों की सफाई और उनको पोषण बस इतने से ही समस्या ठीक हो जाते हैं अब तक हजारों लोग पेट की इन बीमारियों से मुक्ति पा चुके हैं अगर आप भी इन समस्याओं से जूझ रहे हैं तो हमसे संकोच संपर्क कर सकते हैं।

गुरुवार, 30 अगस्त 2018

अमीर लोगों में छुपा हुआ कुपोषण

जब भी कुपोषण की बात चलती है तो हमारा ध्यान छोटे बच्चों और किशोरों की तरफ ही जाता है या फिर गरीबों की ओर। दोस्तों आज हम एक ऐसी समस्या पर बात करेंगे जिस पर ना तो सरकारों का ध्यान जा रहा है और ना ही आम लोगों का।
हम लोग छोटे बच्चों को देखकर व उनका वजन नाप कर कुपोषण का पता आसानी से लगा लेते हैं। अति गरीब लोगों के भी अस्थि पंजर शरीर को देख कर भी हम समझ जाते हैं की यह व्यक्ति कुपोषण का शिकार है। लेकिन आज कल लोगों में एक ऐसा कुपोषण फैल रहा है, जिसे देख कर पता लगा पाना असंभव है, क्योकि व्यक्ति देखने में हृष्ट पुष्ट दिख रहा होता है उसका वजन सामान्य भी हो सकता है और आवश्कता से अधिक भी हो सकता है। चूंकि देखने में हृष्ट पुष्ट होने के कारण उस व्यक्ति का व डॉक्टर का भी ध्यान उसके कुपोषण के प्रति नही जा रहा होता है इसलिए इसे छुपा हुआ कुपोषण ही कहेंगें। अंग्रेजी में इसे हिडन हंगर कहते हैं। इसमें हमारा पेट तो भर रहा होता है  लेकिन हम फिर भी कुपोषित होते हैं ।इस कुपोषण के कारण व्यक्ति दिन प्रति दिन गम्भीर बीमारियों को ओर अग्रसर हो रहा होता है। इन बीमारियों को हम अनेक नाम दे सकते हैं इनके अलग अलग लक्षण हो सकते हैं पर अधिकांश के मूल में यह छुपा हुआ कुपोषण ही होता है। समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब चिकित्सक लक्षणों को देख कर उन्हें दवाने के लिए एलोपैथिक ड्रग्स देने लगते हैं। मैं यहाँ एलोपैथिक ड्रग का विरोध नही कर रहा हूँ लेकिन चिकित्सकों के पास विकल्प भी सीमित हैं यह जानने के की समस्या आखिर हो क्यों रही है। दूसरा चिकित्सक पर तुरन्त परिणाम देने का दवाव भी होता है। मैं यहाँ एक उदाहरण दूँगा मेरी एक परिचित अमीर परिवार की महिला को बुखार आ गया डेढ़ दो महीने तक शहर के कई नामी गिरामी डॉक्टरों को दिखा लिया गया। सभी तरह के एंटीबायोटिक भी खिला दिए गए लेकिन बुखार वहीं का वहीं। आखिर में एक डॉक्टर ने उनका विटामिन D का चेकअप करवाया उसमें उनका विटामिन D का स्तर समान्य से काफी कम निकला। यही उनके बुख़ार न जाने का कारण था। जो उनका लाइफ स्टाइल था उसमें विटामिन D कम होनी ही थी क्योंकि धूप में तो गरीब निकलते हैं अमीर भला क्यों निकलने लगे धूप में। मैंने तो सिर्फ एक उदाहरण दिया है ऐसे अनेकों कारण हमारी समस्याओं के हो सकते हैं जो अभी तक शायद चिकित्सा शास्त्र में भी ज्ञात ना हो।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान दिन प्रतिदिन नए नए पोषक तत्वों की खोज कर रहा है। सामान्यता इन को 7 श्रेणियों में बांट सकते हैं जैसे कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन, विटामिन मिनरल्स,वसा फाइबर और पानी। इन 7 श्रेणियों को माइक्रो न्यूट्रिएंट्स और मैक्रो न्यूट्रिएंट्स के अंतर्गत रखा गया है मैक्रो न्यूट्रिएंट्स के अंतर्गत कार्बोहाइड्रेट बसा प्रोटीन फाइबर और पानी आते हैं। माइक्रो न्यूट्रिएंट्स के अंतर्गत मिनरल्स अर्थात खनिज तत्व विटामिंस आते हैं।
मिनरल्स अर्थात खनिज तत्व ऐसे तत्व होते हैं जो हमारे शरीर में नहीं बनते जो धरती में होते हैं और धरती से ही हमारे शरीर में हमारे भोजन के माध्यम से पहुंचते हैं वैज्ञानिकों ने अब तक 29 प्रकार के तत्वों का पता लगाया है जो हमारे शरीर की प्रक्रिया चलाने के लिए आवश्यक होते हैं। विटामिंस ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स होते हैं जो हमारे शरीर की क्रिया प्रणाली को सुचारु रुप से चलाने के लिए आवश्यक होते हैं अभी तक वैज्ञानिकों ने 13 प्रकार के विटामिंस का पता लगाया है। यहां मैं इन सब के विस्तार में नहीं जाऊंगा अन्यथा यह पोस्ट बहुत लंबी हो जाएगी। यहां पर मैं यह बताना चाहूंगा की इन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी ही हमारे छुपे हुए कुपोषण का कारण है। आज हम लोगों के भोजन में इन सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी खतरनाक स्तर तक कम हो गई है।
अब आप लोग सोच रहे होंगे कि आखिर इसका समाधान कैसे किया जाए दोस्तों उसके दो ही समाधान है या तो ऑर्गेनिक विधि से उपजाए गये अनाजों फलों सब्जियों का सेवन किया जाए या फिर इन पोषक तत्वों का अलग से सेवन किया जाए। दोस्तों ऑर्गेनिक विधि वह विधि होती है जिसमें खेत में किसी प्रकार के रासायनिक उर्वरक व कीटनाशकों व हार्मोन्स का प्रयोग नहीं किया जाता है। इसमें प्राकृतिक खादो जैसे गोबर की खाद फसल सड़ी गली पत्तियों की खाद इत्यादि का ही प्रयोग किया जाता है। इस विधि से उपजाए गए अनाजों व सब्जियों की लागत बहुत अधिक होती है जो एक आम भारतीय वहन नहीं कर सकता जो लोग इसे वहन कर सकते हैं उनके लिए भी यह उत्पाद आसानी से हर जगह उपलब्ध नहीं है। दोस्तों यह पोषक तत्व अलग से बहुत कम कीमत पर उपलब्ध हैं न्यूट्री वर्ल्ड इन्हें माइक्रोडाइट, आयरन फॉलिक प्लस,कैल्शियम प्लस, गेट थे ग्लो इत्यादि के नाम से उपलब्ध करा रहा है माइक्रोडाइट में ही 20 से भी अधिक सूक्ष्म पोषक तत्व हैं और इनकी कीमत प्रतिदिन एक सिगरेट की कीमत से भी कम है। अब फैसला आपके हाथ है किसका चयन करना है।

शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

कहीं आपमें विटामिन डी की कमी तो नहीं

NutriWorld.in आज हम चर्चा करेंगे कि विटामिन डी हमारे लिए क्यों आवश्यक है और इसकी कमी को किस प्रकार दूर किया जा सकता है यह तो हम सभी यह जानते ही हैं की है हड्डियों के लिए अति आवश्यक होता है लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि यह सिर्फ हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है।
हमारी हड्डियों के निर्माण में कैल्शियम की मुख्य भूमिका होती है।
भोजन से कैल्शियम के अवशोषण के लिये शरीर मे विटामिन डी का होना अनिवार्य है यदि शरीर मे विटामिन डी की कमी होगी तब कैल्शियम की भी कमी हो जाएगी।
विटामिन डी की कमी से ह्रदय रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
अगर आपका ब्लड प्रेसर बढ़ रहा है तब उसकी गोली खाना सुरु करने से पहले एक बार विटामिन डी का चेकअप अवश्य करवा के देख लेना चाहिये। क्योंकि विटामिन डी की कमी से भी आपका ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
आप वयस्क हैं और अचानक आप को लगने लगा है कि बुद्धी अच्छे से काम नही कर रही है या स्मृति क्षीण हो रही है तब भी विटामिन डी का चेकअप करवा के देख लें इसकी कमी भी उपरोक्त लक्षणों का कारण हो सकती है।
यदि आपको डिप्रेशन हो रहा है तो डिप्रेशन की दवा लेने से अच्छा है कि कुछ देर धूप में बैठकर हल्का-फुल्का व्यायाम कर लिया जाय क्योंकि विटामिन डी की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है।
छोटे बच्चों और आपको भी यदि शर्दी जुकाम बार बार हो रहा है और ठीक होने में टाइम ले रहा है तो शर्दी खाँसी की दवा देने से पहले कुछ दिन आधा घण्टा धूप में बैठाना शुरू कर दें। बच्चों एवं बड़ो दोनों की रोग प्रतिरोधक शक्ति को ठीक रखने के लिए विटामिन डी जरूरी है।
आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि विटामिन डी की कमी कैंसर टाइप 2 डियाबेटीज़ होने का खतरा भी बढ़ा देती है।
इसके अतिरिक्त यदि आपकी मांस-पेशियों, हड्डियों में पीठ में दर्द रहता है, और शरीर में थकान कमजोरी व आलस्य बना रहता है। तब आप विटामिन डी का चेकअप करवा कर अवश्य देखें यह सब उसकी कमी के कारण भी हो सकता है।
विटामिन डी की कमी को अपना खानपान सुधार कर व धूप में बैठकर पूरा किया जा सकता है इसके अतिरिक्त विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए फूड सप्लीमेंट का भी सहारा ले सकते हैं न्यूट्री वर्ल्ड का कैल्शियम प्लस इसकी कमी को दूर करने का एक आदर्श सप्लीमेंट है।